
सरकार की विनिवेश की घोषणा के बाद जोश से भरे निवेशकों का उत्साह शुक्रवार को भी कम नहीं हुआ। बाजार लगातार तीसरे दिन बढ़त बनाने में कामयाब हुआ। पीएसयू शेयरों को निवेशकों से खासा समर्थन मिला। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार के दौरान मजबूत एशियाई संकेतों के बदौलत 200 अंक चढ़ा। पर रिजर्व बैंक द्वारा डूबत ऋण के लिए प्रोविजनिंग नियमों को सख्त करने से दोपहर बाद बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों पर दबाव पड़ा। इससे सेंसेक्स 16,075.19 के निचले स्तर तक गिर गया। इसके अलावा इस दौरान सूचकांक पर आरबीएस को हुए घाटे का असर भी पड़ा। मगर पीएसयू शेयरों को मिले समर्थन से सेंसेक्स 0.59 फीसदी यानी 94.38 अंकों की बढ़त बनाने में सफल हुआ। इसके बाद सेंसेक्स 16,158.28 के स्तर पर पहुंच गया। पूरे दिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की मांग रही। इसकी वजह से मिडकैप इंडेक्स 2.27 फीसदी यानी 138.92 अंकों की और स्मॉलकैप इंडेक्स 2.24 फीसदी यानी 157.09 अंकों की मजबूती के साथ बंद हुए। निफ्टी 0.64 फीसदी यानी 30.60 अंकों की बढ़त बनाते हुए 4,796.15 पर बंद हुआ।
ब्रोकरों का कहना है कि अमेरिका के कारोबारी उत्पादन में बढ़ोतरी होने के साथ बेरोजगारी में खासी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद अमेरिकी बाजारों में खासा उत्साह देखा गया। इसी वजह से सुबह एशियाई बाजार तेजी के साथ खुले। पर बैंकिंग शेयरों पर दबाव की वजह से घरेलू बाजार शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने में कामयाब नहीं रह पाए।
अशिका स्टॉक ब्रोकर्स के रिसर्च हेड पारस बोथरा ने बताया कि बाजारों ने सीमित दायरे में कारोबार किया। हालांकि रुख तेजी का ही था, लेकिन दोपहर में कुछ शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। मगर अंत में बाजारों में बढ़त जारी रही। बाजार को ऊपर ले जाने में पीएसयू शेयरों का अहम हाथ रहा। पीएसयू शेयरों की बात करें तो एमएमटीसी के शेयर को भारी समर्थन मिला। कंपनी के शेयर ने कारोबार खत्म होने से पहले दिन की 20 फीसदी की अपर लिमिट को छुआ। कंपनी का शेयर 6,024.45 रुपये की छलांग मारकर 36,146.85 रुपये पर आ गया। इस शेयर में दर्ज की गई भारी बढ़त के बाद पीएसयू इंडेक्स सबसे ज्यादा 3.91 फीसदी यानी 331.03 अंकों की मजबूती के साथ बंद हुआ। अन्य पीएसयू शेयरों में एसटीसी 14.84 फीसदी, ड्रेजिंग कॉर्प 12.18 फीसदी, आरसीएफ 11.76 फीसदी, हिंद कॉपर 10 फीसदी और एनएमडीसी 10 फीसदी ऊपर बंद हुए।
पीएसयू के बाद अन्य सेक्टोरल इंडेक्स में रियल्टी 2.81 फीसदी यानी 109.18 अंक चढ़ा। वहीं, मेटल 2.03 फीसदी, बैंकेक्स 1.75 फीसदी, कैपिटल गुड्स 1.70 फीसदी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.56 फीसदी की बढ़त पर रहे। सिर्फ दो इंडेक्स में हल्की गिरावट देखी गई। इनमें एफएमसीजी और ऑटो इंडेक्स शामिल थे।
सेंसेक्स में सबसे ज्यादा तेजी पर रहा जयप्रकाश एसोसिएट्स का शेयर। कंपनी के शेयर में 4.76 फीसदी यानी 10.35 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। टाटा स्टील की घरेलू बिक्री अक्टूबर के दौरान 38 फीसदी की बढ़त हुई। इसकी वजह से कंपनी का शेयर 3.08 फीसदी यानी 14.95 रुपये की मजबूती के साथ बंद हुए। इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 3.06 फीसदी, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज 2.21 फीसदी, लार्सन एंड टूब्रो 2.17 फीसदी, डीएलएफ 2.14 फीसदी, एचडीएफसी 1.93 फीसदी, सन फार्मा 1.78 फीसदी और महिंद्रा एंड महिंद्रा 1.03 फीसदी चढ़े।
गिरावट वाले शेयरों में टाटा पावर 3.84 फीसदी, हिंदुस्तान यूनीलीवर 2.12 फीसदी, हीरो होंडा मोटर्स 1.98 फीसदी, आईटीसी 1.53 फीसदी, टाटा मोटर्स 1.06 फीसदी और मारुति सुजूकी 1.04 फीसदी के नुकसान के साथ बंद हुए। बीएसई में 1,944 शेयर बढ़त और 780 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। गुरुवार के मुकाबले शुक्रवार को बाजार का कारोबार बढ़कर 6,019.18 करोड़ रुपये हो गया। लार्सन एंड टूब्रो के शेयर में सबसे अधिक 707.18 करोड़ रुपये की ट्रेडिंग हुई।
विदेशी और घरेलू फंडों ने की लिवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को बाजारों से 587.02 करोड़ रुपये की शुद्ध लिवाली की। गुरुवार को भी उन्होंने 126.94 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। वहीं, घरेलू फंडों ने शुक्रवार को 236.62 करोड़ रुपये की शुद्ध लिवाली की।
एग्रो-कमोडिटी शेयरों में है मुनाफे की फसल
राहत पैकेज के मद्देनजर कई विकसित देशों ने कृषि क्षेत्र को मिलने वाली सब्सिडी को कम कर दिया या हटा दिया। इसके साथ ही मौसम मे होने वाले बदलावों से दुनिया के कई हिस्सों में फसलों को नुकसान हुआ। बढ़ती हुई क्रूड की कीमतों के बाद एथनॉल बनाने के लिए शुगर, कॉर्न और अन्य खाद्य उत्पादों का प्रयोग बढ़ा है। बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ विकासशील देशों में कैपिटा न्यूट्रीशन लेवल भी बढ़ रहा है।
इसे देखते हुए निकट भविष्य में दुनिया के कई इलाकों में खाद्य पदार्थो की कमी होने की संभावना है। इस ट्रेंड को देखते हुए बीते कुछ सालों से कृषि उत्पादों से जुड़ी कंपनियों की मांग खासी बढ़ी है। ऐसे में लगता है कि एग्रो-कमोडिटी में ट्रेडिंग करने वाली कंपनियों को भविष्य में खासा मुनाफा होगा। लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले निवेशकों को कृषि और रूरल मार्केटिंग में मौजूदगी रखने वाली कंपनियों पर दांव खेलना चाहिए। इन कंपनियों में आईटीसी भी शामिल है, जिसने एग्रो-कमोडिटीज की ट्रेडिंग और निर्यात में मजबूत आधार तैयार कर लिया है। इसके अलावा कुरुतुरि ग्लोबल, केएस ऑयल्स एंड रुचि सोया में भी निवेश किया जा सकता है। एथनॉल की बढ़ती हुई मांग और खपत से बलरामपुर चीनी, बजाज हिंदुस्थान और रेणुका शुगर जैसे शुगर स्टॉक्स पर भी फोकस किया जा सकता है।