Truck sales up 60 % in Oct.
Truck sales up 60 % in Oct.
Source: शिशिर चौरसिया नई द
Published: November 07

अक्टूबर में ट्रकों की बिक्री में 60 फीसदी की बढ़ोतरी


अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती के छंटने से बाजार में ट्रकों की मांग निकलने और ट्रकरों को आसानी से कम ब्याज पर ऋण मिलने से अक्टूबर में इसकी बिक्री 59.18 फीसदी बढ़ी है।
इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) द्वारा उपलब्ध कराये गए आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2009 के दौरान सभी प्रकार के 19,636 ट्रक बिके, जबकि इससे एक वर्ष पहले इसी महीने 12,335 ट्रक बिके थे।

इस दौरान जहां लाइट और इंटरमीडिएट कॉमर्शियल व्हीकल में क्रमश: 33 और 69 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई तो 49 टन क्षमता वाले मल्टी एक्सल व्हीकल में 200 फीसदी की जोरदार वृद्धि हुई है।
अक्टूबर में पांच से साढ़े सात टन क्षमता वाले एलसीवी की बिक्री 1.91 फीसदी बढ़ी। आठ से बारह टन क्षमता वाले आईसीवी में भी 69.27 फीसदी की वृद्धि रही। 15 से 16.2 टन क्षमता वाले एमसीवी में 28.60 फीसदी की जबकि 25 टन से 31 टन क्षमता वाले ट्रकों की बिक्री में 65.64 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 30 से 49 टन क्षमता वाले मल्टी एक्सल ट्रेलर में तो 200 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

आईएफटीआरटी के सीनियर फेलो एस. पी. सिंह का कहना है कि जून से अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलनी शुरू हुई। इससे ट्रकों की मांग निकली तो ट्रांसपोर्टर नई ट्रक डालने पर सोचने लगे। इसी बीच ट्रक फाइनेंस का क्षेत्र भी बदला।

इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (आईआरआर), जिसे आम भाषा में ब्याज दर कहते हैं, में करीब चार फीसदी की कमी हुई। बैंक और अन्य एजेंसियां ने प्रोसेसिंग टाइम घटाया, शतेर्ं घटाई और मार्जिन मनी की कम से कम मांग रखी। इसका समन्वित असर पड़ा। सिंह के मुताबिक अगले साल से देश भर में यूरो थ्री वाहन अनिवार्य हो रहा है। वह गाड़ी करीब 60 से 80 हजार महंगी हो रही है। उससे बचने के लिए लोग पहले से यूरो टू गाड़ी खरीद कर रजिस्टर्ड करा रहे हैं।

ट्रकों की बिक्री बढ़ाने के लिए दिसंबर 2008 में ही किस्तों में कई रियायतें दी थी, वह अभी भी चल रही है। इसके तहत एक्साइज ड्यूटी में छह फीसदी की कमी (इस पर लगने वाली ड्यूटी के हिसाब से 43 फीसदी की कटौती), ट्रक फाइनांस पर लगने वाले ब्याज दरों में दो से तीन फीसदी की कमी, ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए नए ट्रकों की खरीद पर मिलने वाला भारी भरकम 50 फीसदी डिप्रेसिएशन एलाउंस आदि जैसे उपाय घोषित किए गए थे। हालांकि इसकी अवधि बीते मार्च में ही खत्म हो गई थी जिसे सरकार ने अगले वर्ष मार्च तक के लिए बढ़ा दिया है। यह भी एक
आकर्षण है।

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