
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने फंड जुटाने की लागत घटाने के लिए सभी परिपक्वता अवधि वाली एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) पर ब्याज दरों में 0.25 से लेकर 0.50 फीसदी तक की कमी कर दी है। अप्रैल के बाद से एसबीआई ने ब्याज दरों में सातवीं बार कटौती की है। यह बैंकों के पास पर्याप्त तरलता का संकेत है। बैंक सस्ते होम लोन और कार लोन जैसी रिटेल लोन स्कीमों को जारी रखने के लिए भी अपनी फंड लागत में कमी करना चाहता है।
ऐसी संभावना जताई जा रही है कि एसबीआई द्वारा ब्याज दरों में कमी करने के बाद कई दूसरे बैंक भी जमाओं की दरें घटा सकते हैं। हालांकि निजी क्षेत्र के ऐसे बैंक अब भी जमाओं पर ऊंची ब्याज दरें जारी रख सकते हैं, जिनके पास ज्यादा तरलता नहीं है। एसबीआई ने जुलाई में भी ब्याज दरों में 0.25-0.50 फीसदी तक कटौती की थी। इन सारी कटौतियों को जोड़ दिया जाए तो बैंक अब तक करीब 2.25 फीसदी की कमी आठ माह में कर चुका है। एक समय बैंक अक्टूबर 2008 में जब सालाना ब्याज दरें 10.5 फीसदी दे रहा था, तब रोजाना उसके पास 1,000 करोड़ रुपये के जमाएं आ रहे थे। अब हालात एकदम उलट हो गए हैं। बैंक ऊंची ब्याज दरों के इन जमाओं को फिलहाल कम रखना चाहता है। पिछले साल के दिसंबर से तुलना की जाए तो अब तक ब्याज दरों में करीब 3.50 फीसदी तक कटौती हो चुकी है। रिजर्व बैंक ने हाल ही में कहा है कि बैंकों के पास पर्याप्त तरलता है और बैंक अपने धन की लागत कम रखना चाहते हैं।
एसबीआई का सस्ता होम लोन अब मार्च तक नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक ने आठ फीसदी ब्याज दर वाली रियायती होम लोन स्कीम की अवधि को मार्च 2010 तक बढ़ा दिया है। इस तरह बैंक की ओर से रियायती होम लोन आगे भी मिलते रहेंगे। भारतीय स्टेट बैंक की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार बैंक की ओर से त्नमेरा घरत्न योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के होम लोन के लिए पांच साल तक आठ फीसदी ब्याज दर रखने की घोषणा की गई थी। इस लोन की अधिकतम अवधि 10 वर्ष है। पांच से 50 लाख तक के होम लोन के लिए पहले साल ब्याज दर आठ फीसदी तथा दूसरे और तीसरे साल के लिए 8.5 फीसदी है। महंगे घर खरीदने वालों के लिए बैंक की एसबीआई एडवांटेज होम लोन योजना है। इस योजना के तहत पहले साल आठ फीसदी और इसके बाद दूसरे और तीसरे साल के लिए नौ फीसदी की ब्याज ली जाती है। (ब्यूरो)