बादलों की तलाश में दूर तक गया। गली-गली होता हुआ कच्ची कुइयां पहुंचा।
भास्कर डॉट कॉम अपने पाठकों के लिए लेकर आया है जसवंत सिंह की विवादित किताब के कुछ अंश...
‘फिर वह काहे की एश्वर्या हुई? वह तो कैदण हुई। चारों तरफ़ पुलिस वाले। हमने क्या लेना ऐसी ख़ूबसूरती और अमीरी से। हम तो ऐसे ही ठीक हैं। ......
बुकर विजेता सलमान रश्दी तो अपनी किताब "द सतेनिक वेर्सेज़" के चलते कई दिनों से ब्रिटेन में रह रहे हैं
इसके अलावा मुगलिया दौर पर लिखने वाले इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल की किताबें भी विवादित रहीं हैं
अर्जुन ने पार्टी के भीतर अपनी उपेक्षा का ज़िक्र किया था. इसके अलावा अयोध्या पर पीवी नरसिम्हा राव की किताब भी खूब चर्चित रही थी.
अडवानी की बहुप्रचारित आत्मकथा "मेरा देश मेरा जीवन" को तो उनके विरोधियों ने झूठ का पुलिंदा तक कह डाला . ये भी कहा गया की अडवानी ने घटनाओं और तथ्यों को
हलाँकि इस किताब में उन्होंने इस कथित जासूस का नाम नहीं उजागर किया था जिसे लेकर सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं हुई थीं.
किताब में मेनका और इंदिरा गाँधी के रिश्तों पर तल्ख़ टिप्पणियां थीं.
आज़ादी के समय देश की राजनैतिकस्थिति और कांग्रेस के बड़े नेताओं की भूमिका को रेखांकित करती इस पुस्तक पर कांग्रेस को खासी आपत्ति थी.
इस किताब में भारत की आज़ादी और बंटवारे के सन्दर्भ में कई ऐसे प्रसंग हैं जो कांग्रेस को नागवार गुज़रे .
वरिष्ठ भाजपा नेता जसवंत सिंह की जिन्ना पर लिखी किताब "जिन्ना-इंडिया, पार्टीशन, इंडिपेंडेंट" विवादों के घेरे में है
कविता और पाठक के आपसी संबंध पर पिछले लंबे अरसे से पंजाब में एक डिबेट चली आ रही है। बहुत सारे विद्वानों का इसके बारे में अलग-अलग मत है।
साहित्य ने स्वतंत्रता आन्दोलन को राह दिखाने से लेकर उसमे जोश भरने तक कई भूमिकाएं निभायीं हैं .
भारत का विभाजन बीसवीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी, जिसके विध्वंसक असर से हम आज तक नहीं उबर सके हैं।
एक मासिक पत्रिका के तौर पर ‘समावर्तन’ को साफ़-सुथरी छवि वाली पत्रिका की पहचान मिलने में कोई दिक्कत पेश नहीं आई।
अगर हमें स्त्री और साहित्य के बारे में बात करनी हो तो कुछ स्त्री लेखिकाओं और उनकी किताबों के जिक्र के साथ ही बात खत्म कर दी जाती है।
बेगम अख्तर बीसवीं सदी के भारतीय शाीय संगीत का एक ऐसा नाम हैं, जो अपने आप में संगीत का पर्याय बन गई थीं।
पुण्यतिथि आज - पूरे हिंदोस्तान की आवाज़, मोहम्मद रफ़ी साहब को याद करना संगीत की इबादत करना है। इस बुलंद आवाज़ को सलाम..
प्रेमचंद ने अपने साहित्य से एक ऐसी लहर पैदा की, जिनके ऩक्शों पर आने वाली पीढ़ियां चल रही हैं। उनकी अक़ीदत में चंद ल़फ्ज़..